अध्याय 2: पाठ भाग 3
छत्र दान करने से मार्ग में सुख प्रदान करने वाली छाया प्राप्त होती है ।
पादुका दान से वह मनुष्य घोड़े पर सवार हो कर सुखपूर्वक मार्ग पार करता है।
जल से परिपूर्ण कमंडलू के दान से मनुष्य सुख पूर्वक परलोक गमन करता है ।
वस्त्र - आभूषण दान करने से यम दूत प्राणी को कष्ट नहीं देते ।
तिल( सफ़ेद , काले ,भूरे ) के दान से , मन ,वाणी ,और शरीर से किये हुए पाप नष्ट होते हैं ।
सभी साधनों से युक्त शय्या दान से स्वर्ग लोक में 60000 वर्ष तक , इंद्र लोक के भोग भोगता है।
इस के अतिरिक्त ,गौ दान देते समय "नान्दानान्दानाम" के उच्चारण करने से वेत्रनी नदी में नहीं गिरता ।
दुखद , और बिमारी के समय , तिल,लोहा,सोना,रूई का वस्त्र ,नमक,सात अनाज , भूमि का टुकड़ा, देने से पाप कर्मों की शुद्धि होती है।
लोहा दान करने से, यम की नगरी में नहीं जाता। लोहे का दान , हाथों को जमीन के साथ छूते हुए देना चाहिए। यम राज के हाथों में कई प्रकार के लोहे के अस्त्र होते हैं । यह दान उन अस्त्रों के प्रभाब को कम करता है|
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