NI Act धारा 1: संक्षिप्त नाम
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 1: प्रारम्भिक
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¶1. संक्षिप्त नाम—यह अधिनियम परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 कहा जा सकेगा ।
¶स्थानीय क्षेत्र—हुण्डियों आदि से सम्बन्धित प्रथाओं की व्यावृत्ति—प्रारम्भ—इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है; किन्तु इसमें अन्तर्विष्ट कोई भी बात इंडियन पेपर करेंसी ऐक्ट, 1871 (1871 का 3) की धारा 21 पर या किसी प्राच्य भाषा में की किसी भी लिखत से संबंधित किसी भी स्थानीय प्रथा पर प्रभाव नहीं डालता: परन्तु ऐसी प्रथाएं लिखत के निकाय के किन्हीं भी ऐसे शब्दों द्वारा, जिनसे यह आशय उपदर्शित हो कि उसके पक्षकारों के विधिक संबंध इस अधिनियम द्वारा शासित होंगे, अपवर्जित की जा सकेगी; और यह पहली मार्च, 1882 को प्रवृत्त होगा ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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