प्रस्तावना: पाठ भाग 1

गरुड़ पुराण हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथों में से एक है। वैष्णव सम्प्रदाय से सम्बन्धित 'गरुड़ पुराण' में मृत्यु के बाद सद्गति प्रदान करने वाला माना जाता है। इसलिये सनातन में मृत्यु के बाद 'गरुड़ पुराण' के श्रवण का प्रावधान है। इस के अधिष्ठातृ देव भगवान विष्णु हैं।

अठारह पुराणों में 'गरुड़ महापुराण' का अपना एक विशेष महत्व है। क्योंकि इसके देव स्वयं विष्णु माने जाते हैं, इसीलिए यह वैष्णव पुराण है। गरुड़ पुराण के अनुसार हमारे कर्मों का फल हमें हमारे जीवन में तो मिलता ही है, परंतु मरने के बाद भी कार्यों का अच्छा-बुरा फल मिलता है। इसी वजह से इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए घर के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद का अवसर निर्धारित किया गया, ताकि उस समय हम जन्म-मृत्यु से जुड़े सभी सत्य जान सके और मृत्यु वश बिछडऩे वाले सदस्य का दुख कम हो सके।

विष्णु भक्ति

वास्तविक तथ्य यह है कि 'गरुड़ पुराण' में भगवान विष्णु की भक्ति का विस्तार से वर्णन मिलता है। विष्णु के चौबीस अवतारों का वर्णन ठीक उसी प्रकार इस पुराण में प्राप्त होता है, जिस प्रकार ' भगवत पुराण ' में उपलब्ध होता है। आरम्भ में मनु से सृष्टि की उत्पत्ति, ध्रुव चरित्र और बारह आदित्यों की कथा प्राप्त होती है। उसके उपरान्त सूर्य और चन्द्र ग्रहों के mantra , शिव-पार्वती मन्त्र , इन्द्र से सम्बन्धित मन्त्र, देवी saraswati के मन्त्र और नौ शक्तियों के विषय में विस्तार से बताया गया है।

पाठ Banaka के हिंदी ऐप से लिया गया है। स्रोत और संस्करण।