अध्याय 15: पाठ भाग 4
इतना कह कर , उन्हों ने भगवान् विष्णु जी से विदा ली और केशव मुनि के आश्र्म में चले गये ।
श्री हरी , जिन का नाम लेने मात्र से ,सभी दुखों और श्रापों से मुक्ति मिलती है, ऐसे दयालू भगवान् की अपने श्रद्धालू भगतों पर सदा कृपा दृष्टि बनी रहे ।
ॐ नमो नारायण
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